Saturday, 4 August 2012


ओम् अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौम प्रचोदयात् ।।
 
मांगलिक दोष (Manglik Dosha)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार लग्न, चंद्र तथा शुक्र से 1-2-4-7-8-12वें भाव में मंगल हो, तो मांगलिक दोष होता है। इस योग में पति-पत्नी साथ रहते हुए भी आंतरिक रू से कई कोसों दूर रहते हैं। मान लीजिए किसी के यह दोष है, तो उसे डरने की जरू रत नहीं है, क्योंकि ज्योतिष में कुयोग-सुयोग के उपचार भी हैं।
                                 

मांगलिक दोष उपचार: (Remedies for Manglik Dosha)
अगर वर वधू की कुण्डली में इस प्रकार की ग्रह स्थिति नहीं है और मंगली दोष के कारण उससे शादी नहीं कर पा रहे हैं जिसे आप जीवनसाथी बनाने की इच्छा रखते हैं तब मंगलिक दोष के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपचार कर सकते हैं.ज्योतिषशास्त्र में उपचार हेतु बताया गया है कि यदि वर मंगली (mangli)है और कन्या मंगली नहीं तो विवाह के समय वर जब वधू के साथ फेरे ले रहा हो तब पहले तुलसी के साथ फेरे ले ले इससे मंगल दोष तुलसी पर चला जाता है और वैवाहिक जीवन में मंगल बाधक नहीं बनता है.इसी प्रकार अगर कन्या मंगली है और वर मंगली नहीं है तो फेरे से पूर्व भगवान विष्णु के साथ अथवा केले के पेड़ के साथ कन्या के फेरे लगवा देने चाहिए.

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